• STORY

    आशावादी कैसे रहें?

    ये कहानी एक युवक की है, जो अखबार बेचता था, दिनभर अखबार बेचता और शाम को घर आकर घर का काम देखता, उस घर में उसके साथ उसके पिताजी भी रहते थे, जो एक सेठ के गराज में गाड़ी साफ करने का काम करते थे,उसको ये काम अच्छा नहीं लगता था, और वो हमेशा सोचता रहता, कि मैं क्या करूं कि मेरे पापा ये काम छोंड़ दें,  और जैसी गाडियां वो धोते हैं , ऐसी कई गाड़ियों के वो मालिक बन जाएं। वो जब अखबार बेचने जाता तो बस स्टैंड पर जहां वो अखबार बेचता, वहीं पर कुछ यात्री उसका…