बुरी यादें (अतीत) मकड़ी के जाले की तरह है, जिनकी कई परते हैं, और इंसान उन जालों के बीच में फ्सा रहता है, और धीरे धीरे वो उन्ही को अपना सबकुछ समझ लेता है, जैसे मकड़ी अपने जाले से बाहर नहीं आ पाती, लेकिन इंसानो के साथ ऐसा नहीं हैं, क्योंकि उसकी क्षमता अन्य जीवों से कहीं ज्यादा है, लेकिन अब जाले से तो बाहर निकलना ही है, तो कैसे निकलें, इसके लिए हमें ये समझना होगा कि ये सब केवल विचारों में हैं,यानि उसका अब अस्तितव खत्म हो गया है, लेकिन समस्या ये हैं, कि उस याद को कैसे…