भक्ति करने वाले लोग परेशान क्यों रहते हैं, ये प्रश्न अधिकतर वो लोग पूंछते हैं, जो भक्ति नहीं करते या जिनको ये लगता है, कि भक्त के जीवन में कष्ट क्यों होता है, इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी इस प्रश्न को पूंछते हैं, जो भक्ति की शुरूआत करते हैं। इसका उत्तर अगर आप अगर रामचरित मानस से समझते हैं, तो उसमें भगवान कहते हैं, सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं। जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं॥ इसका अर्थ है, कि जैसे ही जीव भगवान के सन्मुख होता है, तो वो करोड़ो जन्म के पाप को नष्ट कर देते हैं। यानि भगवान…