वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री प्रेमानंद जी महाराज जो हर समय लोगों के कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान बता देते हैं, उनके पास एक व्यक्ति प्रश्न लेकर आता है, कि मार्ग में इतनी ज्यादा शिक्षा और चुनौतियां क्यों हैं, तो इसका उत्तर देते हुए प्रेमानंद महाराज कहते है, कौन सा ऐसा मार्ग है, जहां चुनौतियां नहीं हैं, हम जब स्कूल में पढ़ाई करते हैं, तो जो टीचर पढ़ाता है उसी में प्रश्न करता है, वहां भी परीक्षाएं होती है, लेकिन ये हमारा प्रमाद है कि हम उसका उत्तर न दे पाएं, लेकिन एक साल का समय मिलता है, एक…
जन्माष्टमी जिसको लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में ये त्यौहार मनाया जाता है, जन्माष्टमी मुख्य रूप से श्रीकृष्ण उपासको के लिए विशेष दिन होता है, जिसमें सभी भक्त उपवास रखते हैं, जगह जगह पर झांकियां रखी जाती हैं, लोग दिन भर कीर्तन करते हैं, भगवान की पूजा करते हैं, और रात में 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म होने के पश्चचात पूजा अर्चना करके फिर प्रसाद पाते हैं। सनातन धर्म में श्रीकृष्ण भगवान को हर तरह की शिक्षाओं के विशेषज्ञ…
अधर्म करके धन कमाने से क्या होता है ? बृज के एक अद्भुत संत है श्री प्रेमानंद जी महाराज जिनकी वीडियोज काफी वायरल होती रहती हैं, वो एक ऐसे संत है कि आज युवा भी उनकी बात सुनकर अपना जीवन परिवर्तन कर रहे हैं, उनका एक प्रवचन जिसमे वो बताते हैं कि अधर्म से कमाए धन में क्या दोष होता है, उसका जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है। अधर्म से धन कमाने का मतलब लूट करके धूस लेकर, बेइमानी करके, छल, कपट, हिंसा आदि करके जो धन प्राप्त होता है, वो अधर्म की कमाई कहलाती है। आगे प्रेमानंद जी महाराज…
भक्ति करने वाले लोग परेशान क्यों रहते हैं, ये प्रश्न अधिकतर वो लोग पूंछते हैं, जो भक्ति नहीं करते या जिनको ये लगता है, कि भक्त के जीवन में कष्ट क्यों होता है, इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी इस प्रश्न को पूंछते हैं, जो भक्ति की शुरूआत करते हैं। इसका उत्तर अगर आप अगर रामचरित मानस से समझते हैं, तो उसमें भगवान कहते हैं, सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं। जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं॥ इसका अर्थ है, कि जैसे ही जीव भगवान के सन्मुख होता है, तो वो करोड़ो जन्म के पाप को नष्ट कर देते हैं। यानि भगवान…
आप में से बहुत सारे लोगों से भक्ति के बारे में सुना होगा कि भक्ति करो , भक्ति से भगवान मिलते हैं, लेकिन आपको हो सकता है, कि ये पता न हो कि भक्ति कैसै करें, भक्ति कितने प्रकार की होती है, हालांकि ये प्रश्न आस्तिक लोग पूंछते हैं जो भगवान की प्राप्ति चाहते हैं, और जीवन में आनंद चाहते हैं, क्योंकि भक्ति के बिना किसी का कल्याण नहीं हो सकता । आपमें से अधिकांश लोगों ने भक्त प्रहलाद के बारे में सुना होगा, भक्त प्रहलाद ने अपने पिता हिरणक्श्यपु को नवधा भक्ति के बारे में बताया था यानि भक्ति…
भक्तियोग - भगवद्दीता में भगवान कृष्ण द्वारा दिया भक्ति योग के सिद्धांत जैसे मन को श्रीकृष्ण में स्थिर रखना , कृष्ण का चिंतन करना , कर्म का भगवान को समर्पण है।
एक बार एक भक्त से किसी ने पूंछा कि भगवान को नहीं देखा, भगवान को महसूस नहीं किया तो भक्ति क्यों करते हो ? तो भक्त ने बहुत ही सुंदर जवाब दिया, भगवान तुम्हे भले दिखाई न दे, लेकिन मेरे अनुभव में वो हमेशा ही मेरे साथ रहते हैं, तो व्यक्ति ने फिर पूंछा कि हमे अनुभव क्यों नहीं होता, तो भक्त ने कहा तुमने कभी भगवान का नाम जप नहीं किया, ध्यान नहीं किया, संतो की संगति नहीं की, शास्त्रों का अध्ययन नहीं किया तो कैसे अनुभव होगा, तो व्यक्ति ने फिर पूंछा कि क्या बिना इसके अनुभव नहीं…
श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं, परमात्मा समस्त इन्द्रियों के मूल स्त्रोत हैं, फिर भी वे इन्द्रियों से रहित हैं। वे समस्त जीवों के पालनकर्ता होकर भी अनासक्त हैं, वे प्रकृति के गुणों से परे हैं, फिर भी वे भौतिक प्रकृति के समस्त गुणों के स्वामी हैं। उनके हांथ, पांव, आंखें, सिर तथा मुह तथा उनके कान सर्वत्र हैं, इस प्रकार परमात्मा सभी वस्तुओं में व्याप्त होकर अवस्थित हैं। परमात्मा समस्त प्रकाशमान वस्तुओं के प्रकाशस्त्रोत हैं। वे भौतिक अंधकार से परे हैं और अगोचर हैं। वे ज्ञान हैं, ज्ञेय हैं, ओर ज्ञान के लक्ष्य हैं। वे सबके हृदय में स्थित हैं।…