1- मकर संंक्रांति का यह त्यौहार आपके जीवन में तिल के लड्डू जैसी मिठास भर दे, मकर संक्रांति को शुभकामनाएं। 2- आपके सपने हमेशा पतंगो की तरह आसमान की बुलंदियों को छूते रहें, मकर संक्रांति की शुभकामनाएं। 3- जीवन में खुशियां हो जीवन में मिठास लाएं मकर संक्रांति का त्यौहार, संक्रांति की शुभकामनाएं। 4- मकर संक्रांति का यह त्यौहार आपके जीवन में उमंग और उत्साह लेकर आए। 5- मकर संक्रांति के पर्व का स्नान आपके जीवन के सारे पापों को धोकर आपका पुन्यो को बढ़ाए, मकर संक्रांति की शुभकामनाएं। 6- मकर संक्रांति का सूर्य आपके जीवन के सारे अंधकार दूर…
संसार में जन्म लेने का कारण क्या है? वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी से एक जिज्ञासु ने प्रश्न किया कि लोग कहते है, कि वर्तमान जीवन में जो सुख दुख आता है, वो पूर्व कर्मों के हिसाब से आता है और जो पूर्व का सुख दुख है, वो पूर्व कर्मों के अनुसार आता है, तो सृष्टि में जब जन्म हुआ होगा वो किस आधार पर हुआ होगा, इस प्रश्न का उत्तर देते हुए कहते हैं, कि इच्छा , स्वतंत्र इच्छा, इच्छा को त्याग दो अभी खत्म, इच्छा ही तुम्हे सुख दुख में लाने की वृत्ति है, अगर इच्छा का…
जन्माष्टमी जिसको लोग श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी कहते हैं, क्योंकि इस दिन भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और श्रीकृष्ण के जन्मदिन के रूप में ये त्यौहार मनाया जाता है, जन्माष्टमी मुख्य रूप से श्रीकृष्ण उपासको के लिए विशेष दिन होता है, जिसमें सभी भक्त उपवास रखते हैं, जगह जगह पर झांकियां रखी जाती हैं, लोग दिन भर कीर्तन करते हैं, भगवान की पूजा करते हैं, और रात में 12 बजे श्रीकृष्ण जन्म होने के पश्चचात पूजा अर्चना करके फिर प्रसाद पाते हैं। सनातन धर्म में श्रीकृष्ण भगवान को हर तरह की शिक्षाओं के विशेषज्ञ…
अधर्म करके धन कमाने से क्या होता है ? बृज के एक अद्भुत संत है श्री प्रेमानंद जी महाराज जिनकी वीडियोज काफी वायरल होती रहती हैं, वो एक ऐसे संत है कि आज युवा भी उनकी बात सुनकर अपना जीवन परिवर्तन कर रहे हैं, उनका एक प्रवचन जिसमे वो बताते हैं कि अधर्म से कमाए धन में क्या दोष होता है, उसका जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है। अधर्म से धन कमाने का मतलब लूट करके धूस लेकर, बेइमानी करके, छल, कपट, हिंसा आदि करके जो धन प्राप्त होता है, वो अधर्म की कमाई कहलाती है। आगे प्रेमानंद जी महाराज…
कल 03 जुलाई को हाथरस में हुई दुर्घटना के कारण वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज केभक्त अब रात उनके दर्शन नहीं कर पाएंगे, दरअसल हाथरस में नारायण सरकार का सतसंग हुआ था जिसमें भारी भीड़ थी , और भगदड़ मच गई जिसकी वजह से सैकड़ों लोगों की जान चली गई जिसके चलते श्री हित राधा केलि कुंज परिसर की ओर से जारी किए गए नोट में ये कहा गया है, कि हाथरस में हुई घटना बहुत ही हृदयविदारक और दु: खद है , जिसमें हम सबकी गहरी संवेदनाएं परिजनों के साथ हैं, भविष्य में ऐसी घटना ना घटे…
देश के प्रसिद्ध कथावाचकों की पंक्ति में जो आजकल प्रसिद्ध नाम आता है, धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री, बागेश्वर धाम का । बागेश्वर धाम मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के गढ़ा तहसील में एक तीर्थ स्थल है, जहां बाबा बागेश्वर अपना दरबार लगाते हैं। धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का जन्म 4 जुलाई 1996 को गढ़ा गांव में हुआ था, इनकी माता का नाम सरोज गर्ग और पिता का नाम रामकृपाल गर्ग है। शास्त्री जी की अगर शिक्षा की बात की जाए तो वो अपने मुह से ही बताते हैं, उन्होने स्नातक की पढ़ाई की है। बाबा बागेश्वर की अगर पिछली जिंदगी को देखा जाए…
अनिरुद्धाचार्य जी महाराज इनकी नाम किसी परिचय का मोहताज का नहीं है, ये वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचकों में से एक हैं, इनकी कथा में काफी भीड रहती है, इनकी कथाएं लोगों के बीच काफी चर्चा में बनी रहती हैं, क्योंकि ये कथा के साथ अपनी धर्म संस्कृति के लिए भी कार्य करते हैं, इसलिए ये लोगों के निशाने पर भी बने रहते हैं, इनकी कथा में आपको समाज में फैली बुराइय़ों को मिटाने की भी शिक्षा देखने और सुनने को मिलती रहती है जैसे शराब, मांस ,फूहड़ फिल्मों का विरोध इनकी कथा में सामान्य बात है, और साथ साथ मां…
मध्यप्रेदश के छतरपुर जिले में बागेश्वरधाम तीर्थ स्थल है, जहां के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री है, जो कि जगद्गुरू रामभद्राचार्य के शिष्य है, इनकी लोकप्रियता की बात करें तो इतनी कम उम्र में जितनी लोकप्रियता इन्होनो हांसिल की है, शायद ही किसी ने हांसिल की हो, लेकिन फिर भी इनके जीवन में सरलता देखने को मिलती है, हर उम्र के लोग उनके चाहने वाले हैं, चाहे वो युवा हो या बूढ़े। य़े खुद को हनुमान जी के भक्त बताते हैं, और कहते हैं, कि सब हनुमान जी की कृपा है, जहां पर इनकी कथा होती है, वहां पर लोग पागलो…
श्रीकृष्ण भगवान गीता में कहते हैं, चतुर्विधा भजन्ते मां जना: सुकृतिनोअर्जुन। आर्तो जिज्ञासुरथार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ।। हे भरतश्रेष्ठ चार प्रकार के पुन्यात्मा मेरी सेवा करते हैं- आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी तथा ज्ञानी । इसका मतलब है कि चार प्रकार के लोग भगवान की शरण में आते हैं, पहला जो पीड़ित है, दूसरा जो जिज्ञासु हैं, तीसरा जो अर्थ चाहता है, औऱ चौथा है ज्ञानी। तेषां ज्ञानी नित्युक्त एकभक्तिर्विशिष्यते। तिप्रो हि ज्ञानिनअत्यर्थमहं स च मम प्रिय:।। इनमें से जो परमज्ञानी है और शुद्धभक्ति में लगा रहता है, वह सर्वश्रेष्ठ है, क्योंकि मैं उसे अत्यंत प्रिय हूं और वो मुझे अत्यंत प्रिय हैं।…
भक्ति करने वाले लोग परेशान क्यों रहते हैं, ये प्रश्न अधिकतर वो लोग पूंछते हैं, जो भक्ति नहीं करते या जिनको ये लगता है, कि भक्त के जीवन में कष्ट क्यों होता है, इसके अलावा कुछ ऐसे लोग भी इस प्रश्न को पूंछते हैं, जो भक्ति की शुरूआत करते हैं। इसका उत्तर अगर आप अगर रामचरित मानस से समझते हैं, तो उसमें भगवान कहते हैं, सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं। जन्म कोटि अघ नासहिं तबहीं॥ इसका अर्थ है, कि जैसे ही जीव भगवान के सन्मुख होता है, तो वो करोड़ो जन्म के पाप को नष्ट कर देते हैं। यानि भगवान…