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    कोई अगर फायदा उठाता है तो क्या करें?

    प्रेमानंद जी वृंदावन के जाने माने संतों में एक हैं जिनके पास देश विदेश से लोग वचनो प्रभावित होकर  अपनी समस्या का  समाधान पाने के लिए आते हैं, और प्रेमानंद महाराज भी उनकी हर समस्या का समाधान आसानी से बता देते हैं। हाल ही में प्रेमानंद जी के पास एक महिला ये प्रश्न लेकर आई कि अगर कोई व्यक्ति उसका गलत फायदा उठाता है क्या करें? छल कपट करता है, तो क्या उसे छोड़ देना चाहिए ? इस पर प्रेमानंद जी अर्जुन जी का उदाहरण देकर कहते हैं, कि पांड़वो ने अपनी मेहनत से इन्द्रप्रस्थ बनाया और पूरे विश्व को…

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    मार्ग में शिक्षा और चुनौतियां क्यों है।

    वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री प्रेमानंद जी महाराज जो हर समय लोगों के कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान बता देते हैं, उनके पास एक व्यक्ति प्रश्न लेकर आता है, कि मार्ग में इतनी ज्यादा शिक्षा और चुनौतियां क्यों हैं, तो इसका उत्तर देते हुए प्रेमानंद महाराज कहते है, कौन सा ऐसा मार्ग है, जहां चुनौतियां नहीं हैं, हम जब स्कूल में पढ़ाई करते हैं, तो जो टीचर पढ़ाता है उसी में प्रश्न करता है, वहां भी परीक्षाएं होती है, लेकिन ये हमारा प्रमाद है कि हम उसका उत्तर न दे पाएं, लेकिन एक साल का समय मिलता है, एक…

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    काम वासना को कैसे नियंत्रित करें?

    काम वासना को कैसे नियंत्रित करें, इसका उत्तर हम वृंदावन के प्रसिद्ध संत श्री प्रेमानंद जी के प्रवचन से समझते हैं, प्रेमानंद जी एक ऐसे संत हैं जिनसे मिलने हर कोई आता है, चाहे वो कोई प्रसिद्ध नेता हो अभिनेता हो सभी लोग अपने प्रश्न लेकर उनको पास आते हैं और वो सभी के प्रश्नो का उत्तर बड़ी सरलता से देते हैं, एक बार एक व्यक्ति ने प्रेमानंद जी से पूंछा कि कई बार मेरे मन में गलत ख्याल आते हैं, लेकिन उन पर नियंत्रण नहीं हो पाता क्या करूं तो इसका जवाब देते हुए प्रेमानंद जी कहते हैं, कि…

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    तनाव क्यों होता है?

    तनाव क्यों होता है? अगर आप वास्तव में इसका उत्तर ढ़ूढने लग जाएं तो इसका उत्तर मिल जाएगा लेकिन इसके लिए भी समय चाहिए जो आजकल के लोगों के पास बिल्कुल भी नहीं है, लेकिन एक काम तो सभी कर सकते हैं, कि आजसे लगभग दस पन्द्रह साल पहले इस शब्द को लोग जानते भी नहीं थे, लेकिन आजकल ये सुनने को मिल ही जाता है, जबकि पहले के मुकाबले आज सुविधाएं बढ़ गई हैं, लेकिन तनाव भी बढ़ रहा है उसका उत्तर है- 1- प्राकृतिक वातावरण का अभाव, आजकल लोग शहरो में रहते हैं, बंद कमरे में कहीं से…

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    अनिरुद्धाचार्य जी महाराज गौरी गोपाल आश्रम वृंदावन

    अनिरुद्धाचार्य जी महाराज इनकी नाम किसी परिचय का मोहताज का नहीं है, ये वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचकों में से एक हैं, इनकी कथा में काफी भीड रहती है, इनकी कथाएं लोगों के बीच काफी चर्चा में बनी रहती हैं, क्योंकि ये कथा के साथ अपनी धर्म संस्कृति के लिए भी कार्य करते हैं, इसलिए ये लोगों के निशाने पर भी बने रहते हैं, इनकी कथा में आपको समाज में फैली बुराइय़ों को मिटाने की भी शिक्षा देखने और सुनने को मिलती रहती है जैसे शराब, मांस ,फूहड़ फिल्मों का विरोध इनकी कथा में सामान्य बात है, और साथ साथ मां…

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    बागेश्वरधाम सरकार

    मध्यप्रेदश के छतरपुर जिले में बागेश्वरधाम तीर्थ स्थल है, जहां के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री है, जो कि जगद्गुरू रामभद्राचार्य के शिष्य है, इनकी लोकप्रियता की बात करें तो इतनी कम उम्र में जितनी लोकप्रियता इन्होनो हांसिल की है, शायद ही किसी ने हांसिल की हो, लेकिन फिर भी इनके जीवन में सरलता देखने को मिलती है, हर उम्र के लोग उनके चाहने वाले हैं, चाहे वो युवा हो या बूढ़े। य़े खुद को हनुमान जी के भक्त बताते हैं, और कहते हैं, कि सब हनुमान जी की कृपा है, जहां पर इनकी कथा होती है, वहां पर लोग पागलो…

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    अंदर की बुराई से कैसे निपटें?

    अंदर की बुराई से निपटने के लिए सबसे पहले  तो समझना होगा कि आपके अंदर बुराई कौन सी है, क्योंकि बिना बुराई को समझे आप उसको दूर नहीं कर सकते , अधिकांश लोग बाहर की बुराई की बात तो करते हैं लेकिन अंदर की बुराई को सभी लोग इग्नोर कर देते हैं, इंसान के अंदर की बुराई से निपटने के लिए सबसे पहले आप अपने मन पर नजर रखना शुरू करिए, क्योंकि अगर आप अपने मन में नजर नहीं रखेंगे तो आपको पता ही नहीं चल पाएगा कि आपके अंदर कौन सी बुराई है, जब भी आपके मन में विचार…

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    ईर्ष्या क्यों पैदा होती है, और कैसे बचें इससे?

    ईर्ष्या का जन्म कहां से होता ? ईर्ष्या का जो मूल है, वो हमारा मन है, क्योंकि आपके मन की धारणाएं ही ईर्ष्या को जन्म देती है, और माध्यम दूसरा बनता है।

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    भगवत गीता कोटस् कर्मयोग

    न तो कर्म से विमुख होकर कोई कर्मफल से छुटकारा पा सकता है, और न केवल सन्यास से सिद्धि प्राप्त की  जा सकती है। यदि कोई निष्ठावान व्यक्ति अपने मन के द्वारा कर्मेंद्रियों को वश में करने का प्रयत्न करता है,और बिना किसा आसक्ति के कर्मयोग (कृष्णभावनामृत में) प्रारम्भ करता है, तो वह अति उत्कृष्ट है। श्रीविष्णु के लिए यज्ञ रूप में कर्म करना चाहिए,अन्यथा कर्म के द्वारा इस भौतिक जगत में बन्धन उत्पन्न होता है। अत׃ हे कुंतीपुत्र उनकी प्रसन्नता के लिए अपने नियत कर्म करो। इस तरह तुम बन्धन से सदा मुक्त रहोगे। स्वरूपसिद्ध व्यक्ति के लिए न…