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    मुश्किलें संभावनाएं कैसे बनती हैं?

    किसी ने कहा है, आपके सामने हर मुश्किल धराशायी हो सकती है, शर्त केवल यह है कि आप पीछे न हटें एक बार एक युवक नदीं के तट पर टहल रहा था, टहलते चहलते अचानक उसके दिमाग में ख्याल आया कि वो अगर पानी में तैरता , तो कितना , अच्छा होता,लेकिन ये भी सोच रहा था, कि तैरना बहुत जोखिम भरा है, लेकिन बहुत सारे लोग तैरते कैसे हैं ? उनको डर क्यों नहीं लगता, और यही सोचते सोचते वह अपने घर पहुंच गया, और अपने भाई से पूंछा कि लोग पानी में तैरते कैसे हें?  तो भाई ने…

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    आशावादी कैसे रहें?

    ये कहानी एक युवक की है, जो अखबार बेचता था, दिनभर अखबार बेचता और शाम को घर आकर घर का काम देखता, उस घर में उसके साथ उसके पिताजी भी रहते थे, जो एक सेठ के गराज में गाड़ी साफ करने का काम करते थे,उसको ये काम अच्छा नहीं लगता था, और वो हमेशा सोचता रहता, कि मैं क्या करूं कि मेरे पापा ये काम छोंड़ दें,  और जैसी गाडियां वो धोते हैं , ऐसी कई गाड़ियों के वो मालिक बन जाएं। वो जब अखबार बेचने जाता तो बस स्टैंड पर जहां वो अखबार बेचता, वहीं पर कुछ यात्री उसका…

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    किस्मत कैसे बदलती है?

    अगर आपकी किस्मत नहीं बदलती तो ये कहानी जरूर सुनें! एक युवक जो कि मजदूरी करता था, उसके पास पैसे की कमी रहती, वो काफी ईमानदार था , मेहनत करता ,लेकिन उसको इतने पैसे नहीं मिलते कि अच्छे से जीवन चला सके, इसलिए वो बहुत दुखी रहता था। एक दिन वो पास में रहने वाले सेठ के पास गया जो कि काफी धनी व्यक्ति था, उसने आने का कारण पूंछा, तो सेठ ने कहा कि आप इस इलाके के बहुत धनी व्यक्ति है, इसलिए मैं आपके पास आया हूं,कि आप मुझे कोई रास्ता बताइए कि मैं अच्छे पैसे कमा सकूं,…

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    कर्मों का फल!

    किसी ने सच ही कहा है,कर्म का फल उसी तरह कर्म करने वाले को ढूढ़ लेता है, जैसे बछड़ा अपनी गाय को । एक युवक जो कि एक सेठ के यहां काम करता था, उसी से जो पैसा मिलता उसी से अपना जीवन यापन करता था।जहां वो काम करता था उस सेठ के कई और लोग भी काम करते थे, एक बार अचानक से उसके मालिक ने सभी की तनख्वाह बढ़ा दी, लेकिन उस युवक की तनख्वाह नहीं बढ़ाई, अब युवक को जब पता चला कि उसकी तनख्वाह नही बढ़ी, ,तो वह गुस्से में आ गया , और सेठ को…

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    अभ्यास ही गुरू है?

    कोई सफल एक दिन में नहीं होता , लेकिन प्रयास करने पर एक दिन जरूर होता है, कोई व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता, लोग अपनी आदतें बदलकर महान बन जाते हैं। एक आदमी तैराकी सीखना चाहता था,इसी उद्देश्य से वो तैराक के पास गया ,और बोला मुझे तैरना सीखना है,आप मुझे तैरना सिखा दीजिए। तैराक उसे लेकर नदीं के पास लेकर बोला, तुम पहले इन तैरने वालों को देखो, उसके बाद तुम ये बताओ कि तुम्हे ये काम कितना मुश्किल और कितना सरल लगता है, वो आदमी काफी देर तक तैरने वालों को देखता रहा,और उसको ऐसा लग रहा…

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    अच्छा इंसान कैसे बने?

    ये कहानी एक ऐसे आदमी की है, जो  चाहता  था कि आसपास के सभी लोगो की नजरो में वह अच्छा साबित हो जाए और लोग उसके अच्छे कार्यों की तारीफ करें, वह काफी धनी आदमी भी था, उसको लगा कि क्यों न रोज नये नये कपड़े पहना जाए, और शान शौकत की जाए, धीरे धीरे लोग इज्जत करने लगेंगे,ये सोचकरउसने शहर से नये कपड़े मगवाये, और खुद को अच्छा दिखाने के लिए उसने बहुत सारे प्रयास किये, लेकिन उसका प्रय़ास पूरी तरह फेल रहा, एक बार उस गांव में एक बाबाजी ने आए, दिखने में बेहद शांत कोई खास चमक…

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    खुश कैसे रहें? How to be happy

    एक बार एक दर्जी जो कि राजा के यहां कपड़े सिलने का काम करता था, राजा ने अपना कुर्ता सिलने के लिए दिया,और उससे बोला कि अगर मुझे कुर्ता पसंद आ गया तो तुम्हे मुह मागा इनाम मिलेगा। अब दर्जी को लगा कि इस कुर्ते को सिलने के लिए मुझे ज्यादा मेहनत करनी चाहिए, ताकि मैं राजा से इनाम ले सकूं, ये सोचकर दर्जी ने राजा के कुर्तें का नाप लिया, और कुर्ता सिलना शुरू कर दिया। कुछ दिन बीतने के बाद राजा ने कुर्ता मगाया , दर्जी कुर्ता लेकर राजा के पास गया, राजा को भी वो कुर्ता बेहद…

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    निंदा करने से क्या होता है? निंदा का प्रभाव

    निंदा करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता, क्योंकि उसके विचार दूषित हो जाते हैं। एक बार एक आदमी अपने भाग्य से बहुत ज्यादा दुखी हो गया, इतना दुखी की हर इंसान की केवल गलतियां निकाला करता , कई बार इस चक्कर में इसकी दूसरों से भी लड़ाई हो जाती । लेकिन उसकी निंदा करने की आदत नहीं छूटी , और वह काफी बीमार भी पड़ गया,और उसको लगने के लगा कि दुनिया का सारा दुख केवल उसी के पास है,क्योंकि बीमार हो जाने की वजह से वह अब चल भी नहीं पा रहा था, किसी तरह उसने पास…

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    हनुमान जी के जीवन से सीख

    हनुमान जी जब सीता जी का पता ढूढ़कर आए,तो रामजी कहते हैं, हे हनुमान, तुम जैसा उपकारी देवता , मनुष्य कोई भी नहीं है, मैने तुम्हारे बारे में बहुत विचार किया लेकिन मैं किसी भी तरह तुम्हारे ऋण से मुक्त नहीं हो सकता , श्रीराम की ऐसी बातों को सुनकर हनुमान जी अत्यंत प्रसन्न हुए,और श्रीराम जी के चरणो में गिर पड़े, श्रीराम ने उनको चरणों से उठाकर हृदय से लगाया और हांथ पकड़कर अपने पास  बैठा लिया और पूंछने लगे.कि रावन  की इतनी सुरक्षित सोने को लंका जहां पर राछसों का पहरा था, तुमने कैसे जलाया, ये सुनकर हमुमान…