एक बार एक भक्त से किसी ने पूंछा कि भगवान को नहीं देखा, भगवान को महसूस नहीं किया तो भक्ति क्यों करते हो ? तो भक्त ने बहुत ही सुंदर जवाब दिया, भगवान तुम्हे भले दिखाई न दे, लेकिन मेरे अनुभव में वो हमेशा ही मेरे साथ रहते हैं, तो व्यक्ति ने फिर पूंछा कि हमे अनुभव क्यों नहीं होता, तो भक्त ने कहा तुमने कभी भगवान का नाम जप नहीं किया, ध्यान नहीं किया, संतो की संगति नहीं की, शास्त्रों का अध्ययन नहीं किया तो कैसे अनुभव होगा, तो व्यक्ति ने फिर पूंछा कि क्या बिना इसके अनुभव नहीं…
1- Do not think too much of life, just live it. 2-Anger gives rise to confusion, confusion spoils the intellect, when the intellect is disturbed then logic is destroyed, when logic is destroyed then the downfall of a person begins. 3- Do not wait the right time, just start doing the right things, time will be right. 4- Do not find the reason for happiness, just be happy, the reason will find you. 5- If you can be sad in imagination, then why do not you be happy in imaginations. 6- Build a habit to ignore the negative talks otherwise…
1- रंगों की बौछार, गुझिया की मिठास और अपनो का प्यार, मुबारक हो आपको होली का त्यौहार, होली की शुभकामनाएं। 2- जिस तरह होली के अनेक रंग आपके चेहरे को रंग बिरंगा बना देते हैं, होली का यह त्यौहार आपके जीवन को भी अनेक रंगों से भर दे। 3- होली की रंगो की तरह आपका जीवन भी खुशियों से भर जाएं, आपके और आपके परिवार को होली की शुभकानाएं। 4- आओ खेलें अपनो संग होली, सबसे बोलें मीठी बोली , बैर, द्वेष का भाव मिटा के मनाए हैप्पी होली। 5- होली के इस त्यौहार पर कृष्ण कन्हैया आपके जीवन में…
आज का सुविचार [ Motivation in hindi] [Motivational lines in hindi] 1- आप जो भी कर रहे हैं, उसका कुछ न कुछ परिणाम अवश्य है, इसलिए कुछ करने से पहले परिणाम के बारे में जरूर सोचें। 2- अपने कल की चिंता में आज व्यर्थ मत करिए, क्योंकि इस तरह से आप अपना वर्तमान खराब कर रहे हैं। 3- इंसान को दूसरों के चिंतन से ज्यादा खुद की तरक्की में समय लगाना चाहिए, क्योंकि दूसरों के चिंतन से केवल समय खराब होता है। 4- अपने हक के लिए संघर्ष करें, लेकिन साथ साथ दूसरों के हित के बारे में भी सोचें।…
अंदर की बुराई से निपटने के लिए सबसे पहले तो समझना होगा कि आपके अंदर बुराई कौन सी है, क्योंकि बिना बुराई को समझे आप उसको दूर नहीं कर सकते , अधिकांश लोग बाहर की बुराई की बात तो करते हैं लेकिन अंदर की बुराई को सभी लोग इग्नोर कर देते हैं, इंसान के अंदर की बुराई से निपटने के लिए सबसे पहले आप अपने मन पर नजर रखना शुरू करिए, क्योंकि अगर आप अपने मन में नजर नहीं रखेंगे तो आपको पता ही नहीं चल पाएगा कि आपके अंदर कौन सी बुराई है, जब भी आपके मन में विचार…
ईर्ष्या का जन्म कहां से होता ? ईर्ष्या का जो मूल है, वो हमारा मन है, क्योंकि आपके मन की धारणाएं ही ईर्ष्या को जन्म देती है, और माध्यम दूसरा बनता है।
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ईश्वर कुछ न कुछ व्यव्स्था कर देगा कि घर समय से पहुंच जाए, रास्ते में आते समय बहुत सारे लोग मिले जिसे उसने कहा कि उसे घर तक छोड़ दे उसको जल्दी पहुंचना है,
श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं, परमात्मा समस्त इन्द्रियों के मूल स्त्रोत हैं, फिर भी वे इन्द्रियों से रहित हैं। वे समस्त जीवों के पालनकर्ता होकर भी अनासक्त हैं, वे प्रकृति के गुणों से परे हैं, फिर भी वे भौतिक प्रकृति के समस्त गुणों के स्वामी हैं। उनके हांथ, पांव, आंखें, सिर तथा मुह तथा उनके कान सर्वत्र हैं, इस प्रकार परमात्मा सभी वस्तुओं में व्याप्त होकर अवस्थित हैं। परमात्मा समस्त प्रकाशमान वस्तुओं के प्रकाशस्त्रोत हैं। वे भौतिक अंधकार से परे हैं और अगोचर हैं। वे ज्ञान हैं, ज्ञेय हैं, ओर ज्ञान के लक्ष्य हैं। वे सबके हृदय में स्थित हैं।…